ज्ञान के नए क्षितिज तलाशने की मुहिम भारत में परवान चढ़ने लगी है। सरकारें जब शिक्षा के बुनियादी सुधारों में उलझी थीं, तब देश के विश्र्वविद्यालयों ने उन उपलब्धियों की तरफ देखना शुरू किया, जिनके लिए वह बने हैं। वैज्ञानिक शोधों में भारत की प्रगति उम्मीद का चमकदार कोना है। वैज्ञानिक शोध को नापने वाले एच इंडेक्स में नई ऊंचाइयां छूने की विश्र्वविद्यालयों की होड़ सुखद अचरज पैदा करती है। थामसन रायटर्स की ग्लोबल रिसर्च के मुताबिक ज्ञान के नए क्षेत्रों में पिछले पांच वर्षो में भारत के सवा लाख से अधिक शोध पत्र (रिसर्च पेपर) दुनिया के विभिन्न जर्नल्स में प्रकाशित हुए हैं। बगैर किसी तामझाम और प्रचार-प्रसार के भारत में शोधकार्य नई करवट लेने लगा है और दुनिया इसे रेखांकित कर रही है। हाल के वर्षो में भारत ने रसायन, कृषि विज्ञान, मैटीरियल साइंस, फार्माकोलॉजी एंड टॉक्सिकोलॉजी, प्लांट एंड एनीमल साइंस, भौतिक विज्ञान, इंजीनियरिंग, जिओ साइंस, स्पेस साइंस और माइक्रोबायलॉजी क्षेत्र में अनुसंधान के मामले में भारत ने मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। रायटर्स की ग्लोबल रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार 1999 से 2008 के बीच के वर्षो में भी इन विषयों पर शोध में कई मामलों में तो दोगुने तक की वृद्धि हुई है। जिसके चलते दुनिया में भारत का दर्जा सुधरा है। बेहतर शोध को लेकर विश्र्वविद्यालयों के बीच होड़ सी मची है। राष्ट्रीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं विकास अध्ययन संस्थान का एच इंडेक्स बताता है कि देश के 50 चोटी के विश्र्वविद्यालयों में आठ चेन्नई के हैं। हैदराबाद यूनिवर्सिटी, दिल्ली विश्र्वविद्यालय को पछाड़ दूसरे से पहले स्थान पर आ गई है। बनारस हिंदू विश्र्वविद्यालय छठे स्थान से बढ़कर तीसरे स्थान पर पहुंच रहा है। जाधवपुर यूनिवर्सिटी पांचवें से चौथे और पंजाब यूनिवर्सिटी तीसरे से चौथे स्थान पर आ चुकी है। एच इंडेक्स ही वह मानक है जो शोध पत्रों के प्रकाशन के आधार पर शोधार्थियों व संस्थानों का आकलन करता है। कृषि इंजीनियरिंग, ट्रॉपिकल मेडिसिन, ऑर्गेनिक केमिस्ट्री, दुग्ध एवं पशु विज्ञान, बहुधंधी कृषि, टेक्सटाइल, मेडिसिनल केमिस्ट्री और कृषि विज्ञान ऐसे क्षेत्र हैं, जिनमें तेजी से अनुसंधान की गतिविधियां शुरू हुई हैं। इसका नतीजा है कि अमेरिका, जापान, फ्रांस, दक्षिण कोरिया, ताइवान, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड्स जैसे देश भारत के साथ कई क्षेत्रों में साझा शोध करने में लगे हैं।
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Friday, January 7, 2011
एमओयू में ७ लाख ,४ माह में बंटे सिर्फ १ हजार
बिल गेट्स की कंपनी माइक्रोसॉफ्ट और राजस्थान यूनिवर्सिटी के बीच हुए एमओयू का फायदा चार महीने बाद भी ज्यादातर स्टूडेंट्स को नहीं मिल पाया है। करार के तहत कंपनी के सर्वाधिक लोकप्रिय 10 सॉफ्टवेयर वाले प्रोगाम यूनिवर्सिटी के 7 लाख स्टूडेंट्स को मुफ्त दिए जाने थे, लेकिन इसे यूनिवर्सिटी की लेटलतीफी ही मानें, अब तक केवल एक हजार स्टूडेंट्स तक यह पहुंच पाया है। पिछली 15 नवंबर को हुए एमओयू में जोरशोर से घोषणा की गई थी कि यूनिवर्सिटी और 858 संघटक कॉलेजों के स्टूडेंट्स को यह प्रोगाम 16 नवंबर से वितरित किया जाएगा।
ये था सॉफ्टवेयर
यूनिवर्सिटी इंफोनेट के डायरेक्टर अशोक नागावत का कहना है कि ड्रीम स्पार्क प्रोगाम में विजुअल स्टूडियो 2010, विंडोज सर्वर 2008, एक्स एनए स्टूडियो 4, विजुअल बेसिक 2008, विजुअल सी प्लस 2008, एक्स एनए स्टूडियो 3.1, एसक्यूएल सर्वर एक्सप्रेस माइक्रोसॉफ्ट, विजुअल वेब डवलपर, माइक्रोसॉफ्ट मल्टी प्वाइंट, छात्रों को निशुल्क उपलब्ध कराया जाना था। ये हर सब्जेक्ट के स्टूडेंट्स के लिए मददगार है, खासकर विज्ञान वालों के लिए।
माइक्रोसॉफ्ट के अधिकारी हैरान
माइक्रोसॉफ्ट से जुड़े अधिकारियों ने यूनिवर्सिटी के इंफोनेट डिपार्टमेंट में संपर्क किया तो वे हैरान रह गए। दरअसल वे जानना चाहते थे कि प्रथम फेज में ही तीन लाख कोड भेजे थे, वे अगर खत्म हो गए हैं तो द्वितीय फेज के तहत और कोड भेजेंगे, अब तक केवल एक हजार ही बंटे है।
ऐसे होता है इंस्टॉल
सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करने के लिए माइक्रोसॉफ्ट की वेबसाइट पर डाउनलोड का ऑप्शन क्लिक करना पड़ता है। माइक्रोसॉफ्ट ने प्रत्येक स्टूडेंट के लिए एक कोड नंबर दिया है, जिसको ऑनलाइन भरने पर सॉफ्टवेयर इंस्टॉल हो जाता है। यूनिविर्सिटी में अब तक सेंटर फॉर कंनवर्जिग टेक्नोलोजी (सीसीटी) के स्टूडेंट्स को ही ये सॉफ्टवेयर दिया गया है।
ये था सॉफ्टवेयर
यूनिवर्सिटी इंफोनेट के डायरेक्टर अशोक नागावत का कहना है कि ड्रीम स्पार्क प्रोगाम में विजुअल स्टूडियो 2010, विंडोज सर्वर 2008, एक्स एनए स्टूडियो 4, विजुअल बेसिक 2008, विजुअल सी प्लस 2008, एक्स एनए स्टूडियो 3.1, एसक्यूएल सर्वर एक्सप्रेस माइक्रोसॉफ्ट, विजुअल वेब डवलपर, माइक्रोसॉफ्ट मल्टी प्वाइंट, छात्रों को निशुल्क उपलब्ध कराया जाना था। ये हर सब्जेक्ट के स्टूडेंट्स के लिए मददगार है, खासकर विज्ञान वालों के लिए।
माइक्रोसॉफ्ट के अधिकारी हैरान
माइक्रोसॉफ्ट से जुड़े अधिकारियों ने यूनिवर्सिटी के इंफोनेट डिपार्टमेंट में संपर्क किया तो वे हैरान रह गए। दरअसल वे जानना चाहते थे कि प्रथम फेज में ही तीन लाख कोड भेजे थे, वे अगर खत्म हो गए हैं तो द्वितीय फेज के तहत और कोड भेजेंगे, अब तक केवल एक हजार ही बंटे है।
ऐसे होता है इंस्टॉल
सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करने के लिए माइक्रोसॉफ्ट की वेबसाइट पर डाउनलोड का ऑप्शन क्लिक करना पड़ता है। माइक्रोसॉफ्ट ने प्रत्येक स्टूडेंट के लिए एक कोड नंबर दिया है, जिसको ऑनलाइन भरने पर सॉफ्टवेयर इंस्टॉल हो जाता है। यूनिविर्सिटी में अब तक सेंटर फॉर कंनवर्जिग टेक्नोलोजी (सीसीटी) के स्टूडेंट्स को ही ये सॉफ्टवेयर दिया गया है।
भारतीय विश्वंविद्यालयों में विज्ञान अनुसंधान में गुणवत्ताण शिक्षा और विशिष्टीता- कपिल सिब्बखल
केन्द्रीय मानव संसाधन विकास, विज्ञान और प्रौद्योगिकी एवं भू विज्ञान, संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री कपिल सिब्बल ने कहा कि विज्ञान अनुसंधान और भारतीय विश्वविद्यालयों में गुणवत्ता शिक्षा और विशिष्टता के लिए तीन प्रमुख सिद्धान्तों को तय किया है, उच्चतर शिक्षा के किसी भी संस्थान को इन्हें समाविष्ट करने की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि इसकी इच्छा और आवश्यकता रखने वाले सभी लोगों को शैक्षिक अवसर भी उपलब्ध करा रहे हैं।
तमिलनाडु के चेन्नई में एसआरएम विश्वविद्यालय में 98वें ज्ञान सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्री सिब्बल ने कहा कि राष्ट्रीय नवप्रवर्तन परिषद (एनआईसी), नवप्रवर्तन दशक के लिए एक खाका तैयार करेगा, जो एक समग्र और दीर्घकालीन नवप्रवर्तन भारतीय परितंत्र को बनाने में मदद करेगा। उच्चतर शिक्षा के संदर्भ में उन्होंने कहा कि उच्चतर शिक्षा का सकल नामांकन अनुपात 15 प्रतिशत के करीब है।
मंत्री महोदय ने कहा कि उच्चतर शिक्षा में सकल नामांकन और उच्चतर शिक्षा में आपूर्ति और मांग में अंतर को कम करने के लिए मंत्रालय ने इन दोनों पक्षों के संदर्भ में कई कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि उच्चतर शिक्षा में सकल नामांकन का लक्ष्य 2020 के अंत तक दोगुना अर्थात कम से कम 30 प्रतिशत तक होना चाहिए।
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