स्कूली शिक्षकों को सामूहिक जीवन बीमा व स्वास्थ्य बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा की गारंटी देकर प्रतिभाशाली छात्रों को शिक्षक बनने की तरफ रिझाने के प्रयास में पेंच फंस गया है। वित्त मंत्रालय व केंद्रीय योजना आयोग के नकारात्मक रुख के चलते मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल के इस सपने के हकीकत में बदलने के आसार कम हो गए हैं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने प्रतिभाशाली छात्रों में शिक्षक बनने की ललक पैदा करने के लिए उन्हें जीवन बीमा व स्वास्थ्य बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा की योजना बनायी थी। सूत्रों के मुताबिक मंत्रालय ने योजना के मसौदे के साथ उस पर संभावित खर्च का एक प्रस्ताव केंद्रीय योजना आयोग व वित्त मंत्रालय को भेजा था। योजना आयोग तो इस प्रस्ताव को काफी पहले ही गैरजरूरी करार दे चुका है। इस बीच वित्त मंत्रालय ने भी उस पर आने वाले लगभग 500 करोड़ रुपये के खर्च को लेकर हाथ खड़े कर दिए हैं। हालांकि सूत्र बताते हैं कि यह मामला अभी खत्म नहीं हुआ है। संबंधित मंत्रालयों से अब भी विचार-विमर्श की गुंजाइश बरकरार है। मालूम हो कि योजना के तहत शिक्षकों के सामूहिक बीमा का प्रीमियम सरकार भुगतान करना चाहती है, जिसका फायदा 60 लाख स्कूली शिक्षकों को मिलता। सरकार लगभग 13 लाख स्कूली शिक्षकों की कमी से जूझ रही है। कपिल सिब्बल ने प्रतिभाशाली लोगों को शिक्षक बनने की तरफ आकर्षित करने के साथ ही उन्हें और मान-सम्मान के मद्देनजर सामाजिक सुरक्षा की योजना बनाई थी। बताते हैं कि योजना के तहत सामूहिक जीवन बीमा योजना के तहत शिक्षक की सेवानिवृत्त पर एकमुश्त पांच लाख रुपए, जबकि नौकरी के दौरान मृत्यु पर दो लाख रुपये भुगतान का प्रस्ताव है।
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Sunday, January 9, 2011
गरीबी कोटे में नहीं चलेगी पब्लिक स्कूलों की मनमानी
राजधानी के पब्लिक स्कूल सामन्य दाखिले में तो मनमानी करते ही हैं, साथ ही वे शिक्षा के अधिकार कानून के तहत 25 फीसदी सीट पर गरीब बच्चों के होने वाले दाखिले में खेल करने से बाज नहीं आते। अकसर वे अपने स्टाफ या अन्य जान-पहचान के व्यक्ति के बच्चों को दाखिला देकर कोटा पूरा दिखा देते हैं। बड़े पैमाने पर होने वाले इस गड़बड़झाला को रोकने के लिए शिक्षा निदेशालय ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। निदेशालय ने साफ कर दिया है कि चाहे जो हो जाए, आर्थिक पिछड़े वर्ग की सीटों पर स्कूलों की चालाकी नहीं चलने दी जाएगी। स्कूलों को सीटों को भरने से लेकर, इस वर्ग के दाखिले की पूरी प्रक्रिया की जानकारी न केवल सार्वजनिक करनी होगी, बल्कि निदेशालय इसमें अपनाई जाने वाली लॉटरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी करवाएगा। इस वर्ग के बच्चे का दाखिला रद करने पर स्कूल को इसका कारण बताना होगा। निदेशालय ने अभिभावकों को अधिकार दिया है कि वे यह जान सकें कि उनके बच्चे को दाखिला देने से मना क्यों किया गया? इतना ही नहीं दाखिला रद करने के कारणों की भी वीडियो रिकार्डिग होगी जो कि अभिभावकों को बतानी होगी। आर्थिक पिछड़े वर्ग के बच्चों को दाखिले में राहत देते हुए सरकार ने इस वर्ग के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। दिशा-निर्देशों में स्कूलों को स्पष्ट किया गया है कि अगर स्कूल को किसी कारण से दाखिला निरस्त करना पड़ता है तो इसको रिकार्ड करना होगा। इस रिकॉर्डिग की जानकारी अभिभावकों को भी देनी होगी जिससे कि वह जान सकें कि दाखिला क्यों निरस्त किया गया। शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी किए गए निर्देशों के अनुसार दाखिले के लिए ड्रा निकालने की प्रक्रिया की वीडियोग्राफी होगी और इसकी सीडी या डीवीडी उपशिक्षा निदेशक को सौंपनी होगी जिससे कि वह जान सकें कि दाखिले का लाभ कितने बच्चों को हुआ है। दिशा-निर्देश में कहा गया है कि हर स्कूल में 25 फीसदी सीटें इस वर्ग के लिए आरक्षित होंगी। इस वर्ग की सीटों के लिए निजी स्कूलों को जो भुगतान किया जाएगा, वह उतना ही होगा जितना सरकार अपने स्कूलों के बच्चों पर खर्च करती है। स्कूलों पर जिला दाखिला मॉनिटरिंग कमेटी की भीनजर रहेगी। इसमें गरीब वर्ग से संबंधित अभिभावक स्कूलों की शिकायत कर सकते हैं। इसके तहत अभिभावकों को लाभ देने के लिए हेल्प डेस्क का भी गठन किया गया है।
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